best of parveen
Sunday, 18 May 2025
चाहत
रिश्तो को झेल रहा हूँ
जाती हुई सुबह की शाम देख रहा हूँ
ऐसा नही सोचता था कि
मैं जो चाहता हूँ वो हो जाता
मगर ऐसा भी नही हुआ कि
जो मैं नही चाहता था सिर्फ वो हुआ
न खुश हूँ न नाराज हूँ
बस वक्त की हिमाकत देख रहा हूँ।
प्रवीन झांझी
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment