मोढ़
आज फिर कुछ बीते पल याद आ गए
आज फिर वो गुजरे कल हमे रुला गये
आज फिर तुम्हारी यादो की खुश्बो ने हमे महका दिया
आज फिर तुम्हारे चहेरे के नूर ने हमे बहका दिया
कुछ पल के लिए हम आज को भूल गये
कुछ पल के लिए हम रिश्तो पर लगे दाग को भूल गए
भूल गये कुछ पल के लिए की बेवफा हो तुम
भूल गये कुछ पल के लिए की हो गयी शाम जिस की वो सुबह हो तुम
की थी जब बेवफाई तुमने तब शायद इतना नहीं रोये थे हम
समझोगी हमारी वफ़ा को इन्ही ख्यालो मै खोये थे हम
फिर बीतते समय की धूल ने उन यादो को छुपा दिया
फिर दिल के आइने मै उभरे नए चहेरो ने तुम्हारे अक्स को भी छुपा दिया
न जाने हुआ क्या आज जो तुम याद आ गयी
न जाने आज क्यों जीवन के इस मोढ़ पर तुम हमसे टकरा गयी
भूल गए थे जिन पलो को हम
उन भूली बिसरी यादों को क्यों याद करा गयी
इस मोढ़ पर जब हो गयी हमारे तुम्हारे जीवन की शाम
करके याद अपनी बेवफाई शायद तुम घबरा गयी
देने को सफाई अपनी आखरी पल मै अब आ गयी
मगर दे पायगो क्या वापिस उन फूलो को
जो तुमने पैरो के नीचे कुचल दिए
दोगे दिलासा हमे अब क्या इस अंतिम मोढ़ पर
क्योंकि हम कहके अलविदा अब तो चल दिए II
लेखक प्रवीण चन्द्र झांझी