क्या चाहते हो तुम
मैं फिर एक बार
उन यादों में खो जाऊ
हो चुके गडमड जो चेहरे यादों में
मैं फिर उन्हें जहन में ढूंढने निकल जाऊ
मत भेजो यारो उन यादों की गलियों में
कंही फिर एक बार न
लिपट कर उन गलियो की दीवारों
से
कंही अपना आपा न खो जाऊ।
प्रवीन झांझी
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