अदा
वो मेरी वफाओ का जवाब क्या देंगे
जो खुद कभी नही जले
जो खुद कभी नही जले
वो रोशिनी के लिए मेरे चिरागो को आफताब क्या देंगे
जिन्होंने मनाया है सदा जशन मेरी बर्बादी का
वो मुझे देखकर आबाद
जिन्होंने मनाया है सदा जशन मेरी बर्बादी का
वो मुझे देखकर आबाद
अब मुबारकबाद भी क्या देंगे
अगर तुम न चाहते
तो हम बर्बाद न होते
हम भी होते कामयाब
अगर तुम हमारे राजदार न होते
जख्म तो हमेशा अपने ही देते है
क्योंकि अपने ही सदा हमारे करीब होते है
गैरो को क्या पता
कि हमे किस बात से तकलीफ होती है
अब तेरी बेवफाई का रोना रोये
कि अपनी वफाओ की नाक़मयाबी का मातम मनाये
क्योंकि तुम अब भी चले आते हो हमारी जिंदगी में जब जी चाहे
तुम्हारी बेवफाई ने किया हमे कंहा कंहा से जख्मी
हम ये तुम्हे कैसे समझाये
न कोई शिकवा न कोई मलाल
बस खड़े हो जाते हो तुम सामने हमारे बड़ी मासूमीयत से नजरे झुकाये
शायद ये ही वो तुम्हारी एक अदा है
कि जिस पर हम फ़िदा है।
लेखक प्रवीन चन्द्र झांझी