Tuesday, 18 February 2014

पहला प्यार 
तुमसे मिलने से पहले नही जानते थे की प्यार क्या होता है
तुमसे बिछड़ने के बाद ये भी याद नही की यार क्या होता है
जिस शिदत से चाहा तुम्हे
फिर वो चाहत किसी और के लिए अपने दिल में जगा  नही पाया
क्योंकि तुमने दिल के किसी कोने को कभी खाली ही रहने न दिया 
इसलिए  फिर किसी और को अपने दिल में बसा नही पाया


शायद तभी कहते है की पहला प्यार ही असली प्यार होता है
बाकी तो सब रिश्तो को व्यापार होता है
व्यापार में तो कामयाबी की ख़ुशी और
नाकामयाबी का अवसाद  होता है
पर पहले प्यार में तो जिंदगी का मतलब बस यार होता है 
न कोई  ख़ुशी अपनी न कोई गम अपना 
बस सब कुछ यार के चेहरे पर ही निसार  होता है
मुस्करा देता है यार अगर तो खुदा का दीदार होता है 
चुरा ली नजर कंही यार ने तो सारा जहान ही वीरान होता है


माना की हम चंद लम्हे ही संग संग गुजार पाए
पर कैसी होती जिन्दगी अगर वो गुजरती तुम्हारे साथ
इस सोच से कभी हम खुद को जुदा न कर  पाए
जिन्दगी की इस शाम में जब सांझ की किरने भी साथ छोड़ने को है
तब भी उषा की पहली  किरण को हम अब भी भुला नही पाये 


ऐ रब जितना सोचता हूँ इतनी ही वफा हो मेरे यार में अगर 
तो मिलवाना सदा के लिए उससे अगले जन्म
क्योंकि इस जन्म में तो हम उनकी नजदीकियों  का अहसास कर  नही पाये 
नही तो  रखना इतनी ही छोटी मुलाकातमेरी  मेरे यार से
गुजार पाऊ याद में उस मुलाकात के बाकी अपनी  जिन्दगी
कि  सिवा यार के हम याद कर न पाये 


ऐ मेरे रब बस है इल्तजाह तुझसे इतनी   
कि करवाना अहसास मेरे यार को कि
चाहता हूँ बहुत शिदत से मै उस 
क्योंकि मै  व्यापार नही सिर्फ  
प्यार करता हूँ, सिर्फ  प्यार करता हूँ।

लेखक : प्रवीन चन्द्र झांझी
      

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