कुछ
कुछ दूर सा कुछ पास सा
कुछ अनजाना से कुछ अपना सा
कुछ कहता सा कुछ सुनता सा
वो कुछ भी नही पर सब कुछ है
शायद इसी का नाम अपनापन है
कंही कुछ अपेक्षा नही
पर एक उम्मीद भर है
कि जब जरूरत होगी
तो वो साथ ही होगा
रिश्तो के किसी नाम के बिना
वो मेरा सबसे अपना है ।
प्रवीन झांझी।
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