Wednesday, 31 May 2023

एहसास

एहसास 

जब कभी भी मै बहुत तन्हा  होता हूँ
नही होता तब मै पास भी खुद के
होकर व्यस्त मै बहुत, जाने कहाँ होता हूँl

मेरे पास आकर मेरे साथ
मेरे गुजरे हुए पल बैठ जाते है
जाने वो ले जाते है मुझ को कंहा
छोडकर मुझे यादो के समुन्द्र में तन्हा 
खुद वो न जाने  कंहा खो जाते हैl

कभी कुछ अक्स आकर लहरों से
मेरे चेहरे को आंसुओ से भिगो जाते है
कभी कुछ यादो के गर्म हवा के झोंके 
मेरे शरीर को छूकर
कुछ भूले हुए स्पर्शो  के एहसासों में 
डुबो जाते  हैl

कभी कुछ सर्द हवाए बेवफा यादे बनकर
मेरे बदन को झंझोर जाती है
कैसे की हमसफरो ने बेवफाई
ये बाते फिर मेरे जहन में उभर आती हैl

सोचता हूँ मै की ये यादे 
कब मेरा पीछा छोड़ेगी
और कब मेरे आज पर से  
मेरे कल की परछाईया 
अपना मुख मोड़ेगीl
       
ऐ गुजरे जमाने या तो 
मेरे गुजरे कल के सुनहरे पलो को 
मेरे आज का हिस्सा बना दे 
या फिर मत आ बार बार 
रखने  दे मुझे 
मेरे आंसूओ को अपनी पलको में छिपा केl

ये आंसू ही तो 
मेरे चेहरे को भिगोकर 
मुझे खींच कर वापिस आज में ले आते है
और मेरे आज को 
मेरे बीते हुए  कल में डूबने से बचाते हैll

लेखक प्रवीन चन्द्र झांझी

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