Tuesday, 27 May 2025

वक़्त

क्या चाहते हो तुम
मैं फिर एक बार 
उन यादों में खो जाऊ

हो चुके गडमड 
जो चेहरे मेरी यादों में
मैं फिर उन्हें जहन में
 ढूंढने निकल जाऊ

मत भेजो मुझे 
उन यादों की गलियों में
कंही फिर एक बार न लिपट कर 
उन गलियो की दीवारों से
कंही अपना आपा न खो जाऊ।

प्रवीन झांझी

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