इंतजार मंजिल का (WAITING FOR THE AIM)
मंजिल अब आना होगा पास तुम्हे चलकर मेरे
थक गया हूँ बहुत मै अपनों से लड़ते लड़ते
कमजोर हें काया टूटे हें पंख
उड़कर अब मै आ नही सकता पास तेरे
अतीत मै रहता हूँ खोया खोया
इंतजार तेरा मै करते करते
सोचता हूँ कब आएगा वो लम्हा
जब खींच सकेगा न कोई बाँहों से मुझको तेरे
सहते सहते जुल्म ज़माने के
थक गयी है आत्मा मेरी रोते रोते
शायद न मै इस जमाने के काबिल था
और न जमाना मेरे काबिल था
वरना न दूर होता जमाना हमसे और न हम जमाने दूर होते
ऐसा नही कि सदा राही ही है पास जाता मंज़िल के
है कुछ ऐसे भी िरले लोग होते
जो अंतिम विदाई को मानकर मंज़िल अपनी अपनी साँसों की लडिया है पिरोते II
प्रवीन चन्द्र झांझी
मंजिल अब आना होगा पास तुम्हे चलकर मेरे
थक गया हूँ बहुत मै अपनों से लड़ते लड़ते
कमजोर हें काया टूटे हें पंख
उड़कर अब मै आ नही सकता पास तेरे
अतीत मै रहता हूँ खोया खोया
इंतजार तेरा मै करते करते
सोचता हूँ कब आएगा वो लम्हा
जब खींच सकेगा न कोई बाँहों से मुझको तेरे
सहते सहते जुल्म ज़माने के
थक गयी है आत्मा मेरी रोते रोते
शायद न मै इस जमाने के काबिल था
और न जमाना मेरे काबिल था
वरना न दूर होता जमाना हमसे और न हम जमाने दूर होते
ऐसा नही कि सदा राही ही है पास जाता मंज़िल के
है कुछ ऐसे भी िरले लोग होते
जो अंतिम विदाई को मानकर मंज़िल अपनी अपनी साँसों की लडिया है पिरोते II
प्रवीन चन्द्र झांझी
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