ADHURE LOG (INCOMPLETE PEOPLE)
अधूरे लोग
कुछ लोग हमेशा अधूरे रहते है
सब के होते हुए भी पास
वो दिल से सदा सूने रहते है
कुछ लोग हमेशा अधूरे रहते है
जब चाहते है वो किसी को, तो चाहते है इस शिद्त से
की सामने वाला भी उस चाहत से घबरा जाता है
नहीं पता वो समझ की है या नही
सब के होते हुए भी पास
वो दिल से सदा सूने रहते है
कुछ लोग हमेशा अधूरे रहते है
जब चाहते है वो किसी को, तो चाहते है इस शिद्त से
की सामने वाला भी उस चाहत से घबरा जाता है
नहीं पता वो समझ की है या नही
वो काबिल उस चाहत के
और इसी उलझन में वो खुद को दोराहे पर खड़ा पाता है
मगर चाहतो के सफर में वो सबसे बेखबर
सदा अपने सपनो से जुडे रहते है
कुछ लोग हमेशा अधूरे रहते है
वो रहते है अधूरे क्योंकि उन्हें वक्त कि वफ़ा नही मिलती
उन्हें मिलता है तब जब उसे पाने की चाह नही रहती
रोते है अरमान उनके पर जुबान बेवफा कुछ नही कहती
उनके साथ यह सब होता है क्योंकि वो
अपने से परायो से घिरे रहते है
कुछ लोग हमेशा अधूरे रहते है
जब नहीं दिया तुमने हमें अपना अधूरापन
तब हम तुमे अपना अधूरापन कैसे दिखाते
मगर चाहतो के सफर में वो सबसे बेखबर
सदा अपने सपनो से जुडे रहते है
कुछ लोग हमेशा अधूरे रहते है
वो रहते है अधूरे क्योंकि उन्हें वक्त कि वफ़ा नही मिलती
उन्हें मिलता है तब जब उसे पाने की चाह नही रहती
रोते है अरमान उनके पर जुबान बेवफा कुछ नही कहती
उनके साथ यह सब होता है क्योंकि वो
अपने से परायो से घिरे रहते है
कुछ लोग हमेशा अधूरे रहते है
जब नहीं दिया तुमने हमें अपना अधूरापन
तब हम तुमे अपना अधूरापन कैसे दिखाते
शायद तुम तो जीना चाहती थी सिर्फ खुद के लिए
मगर हम तो सिर्फ तुम्हारे लिए थे जीना चाहते
वाकिफ थी तुम हमारी फितरत से
इसीलिए चाहती थी कि तुम्हारे सूनेपन के गड्डे हम भर जाते
शायद समझती थी तुम कि चाहे हो जाए तन्हा कितने भी हम
पर तुमसे शिकवे का कभी कोई शब्द भी न कहते
मगर है ये हद हमारी दीवानगी की
मगर हम तो सिर्फ तुम्हारे लिए थे जीना चाहते
वाकिफ थी तुम हमारी फितरत से
इसीलिए चाहती थी कि तुम्हारे सूनेपन के गड्डे हम भर जाते
शायद समझती थी तुम कि चाहे हो जाए तन्हा कितने भी हम
पर तुमसे शिकवे का कभी कोई शब्द भी न कहते
मगर है ये हद हमारी दीवानगी की
कि या तो हम रहते है तुम्हारे साथ,या फिर अपनी चाहतो के साथ रहते है
हम अकेले ही संजीदगी से अपने सपनो से जुड़े तन्हाई के आगोश में रहते है
बेखुदी में भी करते है बाते सिर्फ तुम्हारे साथ और नादान दिल को ये समझाते है
कि कुछ लोग हमेशा अधूरे रहते है
बेखुदी में भी करते है बाते सिर्फ तुम्हारे साथ और नादान दिल को ये समझाते है
कि कुछ लोग हमेशा अधूरे रहते है
होते है दीवाने ऐसे भी जो रहकर भी अकेले मस्त इतने रहते है
कि अपनी मुहब्ब्त कि अपूर्णता में भी इतने पूरे रहते है
नही करते अपने महबूब से वो शिकवा बेवफाई का
उस बेवफा की पूर्णता में ही अपने अधूरेपन को भी भूले रहते है
शायद इसीलिए कुछ लोग अधूरे रहकर भी खुद में पूरे रहते है
और नादान जमाने की नजर मै वो लोग हमेशा अधूरे रहते है II
कि अपनी मुहब्ब्त कि अपूर्णता में भी इतने पूरे रहते है
नही करते अपने महबूब से वो शिकवा बेवफाई का
उस बेवफा की पूर्णता में ही अपने अधूरेपन को भी भूले रहते है
शायद इसीलिए कुछ लोग अधूरे रहकर भी खुद में पूरे रहते है
और नादान जमाने की नजर मै वो लोग हमेशा अधूरे रहते है II
लेखक प्रवीन चन्द्र झांझी
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