best of parveen
Friday, 12 September 2014
मर्जी तुम्हारी
इंसान करता है
पीढ़िया भुगतती है
सदिया बीतती है
इतिहास बोलता है
आज दोराहे पर खड़े है समाज
करो फैसला किधर जाना है
बनना है इतिहास पुरुष
या कायर कहलाना है II
लेखक प्रवीन चन्द्र झांझी
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