Friday, 12 September 2014

निर्णय 

जिन्दगी में कई ऐसे क्षण भी आते है 
जब जिन्दगी और मौत 
आमने सामने खड़े हो जाते है 


अक्सर इन्सान जाता है जिन्दगी के साथ 
और फिर कुछ देर बाद 
फिर वैसे ही मुकाम पर आकर खड़ा हो जाता है 
और वैसे ही फिर एक बार
जिंदगी के साथ चला जाता है 


मगर है ऐसी महबूबा  मौत  कि 
 अगर चला जाए एक बार वो साथ उसके 
तो वापिस पास  वो जिन्दगी के 
फिर कभी नही आता है 

लेखक प्रवीन चन्द्र झांझी

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