ऑंखें बोलती हें
कहते हें की ऑंखें बोलती हें
कभी बचों की ऑंखें
उत्सुकता से राहे जोतती हें
कही जवानी की ऑंखें
सुनहरे सपनो को तोलती हें
वही अधेढ़ो की आँखों मै
चिन्ताओ की रेखाए ढोलती हें
और आते आते बुढ़ापा
आँखों मै यादे खोजती हें
जी हाँ ऑंखें बोलती हें II
लेखक :प्रवीन चन्द्र झाँझी
कहते हें की ऑंखें बोलती हें
कभी बचों की ऑंखें
उत्सुकता से राहे जोतती हें
कही जवानी की ऑंखें
सुनहरे सपनो को तोलती हें
वही अधेढ़ो की आँखों मै
चिन्ताओ की रेखाए ढोलती हें
और आते आते बुढ़ापा
आँखों मै यादे खोजती हें
जी हाँ ऑंखें बोलती हें II
लेखक :प्रवीन चन्द्र झाँझी
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