हालात
कहते है लोग की शराब आदमी को तमीज भुला देती है,
मगर सच तो ये है कि ये वो माशूक है जो
कुछ पल के लिए ही सही पर
अपनी जिन्दगी अपने हिसाब से जीने का समा बना देती है,
जमाना जो न करता बेवफाई
तो शराब कि जरूरत ही क्यों पडती
करती हर शाम हमारा खड़ी होकर चौखट पर इन्तजार
तो हमारी मयखाने कि इस लालपरी पर नजर ही क्यों पडती
कहते है लोग कि न होती शराब
तो जमाने में ये बुराईया न होती
कहता हूँ मै कि जो न होती बुराईया जमाने में
तो शराब पीने कि नौबत न आती
बुराई शराब में नही
बुराई इस बात में है कि इंसान कि नीयत में खोट है
नही मिटा पाते अपने अंदर की तृष्णा को
असलियत से लेते मुंह मोड़ है
अब छोड़ो मत सोचो कि
पहले अंडा आया या मुर्गी आई
और न उलझो इसमें की
शराबी में या शराब में किस में है बुराई
हालत को बदलो की कोई शराब के पास न जाय
करो प्यार इतना की कोई शराबी न बन पाये II
लेखक : प्रवीन चन्द्र झांझी
कहते है लोग की शराब आदमी को तमीज भुला देती है,
मगर सच तो ये है कि ये वो माशूक है जो
कुछ पल के लिए ही सही पर
अपनी जिन्दगी अपने हिसाब से जीने का समा बना देती है,
जमाना जो न करता बेवफाई
तो शराब कि जरूरत ही क्यों पडती
करती हर शाम हमारा खड़ी होकर चौखट पर इन्तजार
तो हमारी मयखाने कि इस लालपरी पर नजर ही क्यों पडती
कहते है लोग कि न होती शराब
तो जमाने में ये बुराईया न होती
कहता हूँ मै कि जो न होती बुराईया जमाने में
तो शराब पीने कि नौबत न आती
बुराई शराब में नही
बुराई इस बात में है कि इंसान कि नीयत में खोट है
नही मिटा पाते अपने अंदर की तृष्णा को
असलियत से लेते मुंह मोड़ है
अब छोड़ो मत सोचो कि
पहले अंडा आया या मुर्गी आई
और न उलझो इसमें की
शराबी में या शराब में किस में है बुराई
हालत को बदलो की कोई शराब के पास न जाय
करो प्यार इतना की कोई शराबी न बन पाये II
लेखक : प्रवीन चन्द्र झांझी
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