नतीजा
मेरी आँख में छुपी नमी को हरेक ने देखा
पर शायद तुम्हारी आँखे
मेरी उस नमी को देख नही पाई
मेरी आवाज के दर्द को हरेक ने पहचाना मगर
शायद वो मेरी दर्द भरी आवाज
तुम कभी सुन नही पायी
यह 'शायद' ही शायद एक कड़ी है हमारे रिश्ते की
यह 'शायद' का भ्रम ही वजह है मेरी तसल्ली की
डरता हूँ कि जिस दिन ये शायद
हम दोनों के बीच से हट जाएगा
उस दिन हमारा यह रिश्ता भी
किसी नतीजे पर पहुंच जाएगा
या तो हम बह निकलेगे
मिलकर मचलती लहरों की तरह
नही तो रह जायेंगे
शायद देखते दूर से एक दुसरे को
नदी के दो किनारों की तरह .... दो किनारों की तरह II
लेखक प्रवीन चन्द्र झांझी
मेरी आँख में छुपी नमी को हरेक ने देखा
पर शायद तुम्हारी आँखे
मेरी उस नमी को देख नही पाई
मेरी आवाज के दर्द को हरेक ने पहचाना मगर
शायद वो मेरी दर्द भरी आवाज
तुम कभी सुन नही पायी
यह 'शायद' ही शायद एक कड़ी है हमारे रिश्ते की
यह 'शायद' का भ्रम ही वजह है मेरी तसल्ली की
डरता हूँ कि जिस दिन ये शायद
हम दोनों के बीच से हट जाएगा
उस दिन हमारा यह रिश्ता भी
किसी नतीजे पर पहुंच जाएगा
या तो हम बह निकलेगे
मिलकर मचलती लहरों की तरह
नही तो रह जायेंगे
शायद देखते दूर से एक दुसरे को
नदी के दो किनारों की तरह .... दो किनारों की तरह II
लेखक प्रवीन चन्द्र झांझी
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