मयखाना या बुतखाना
कौन जीता है कौन हारा है
क्या तुम जीत कर भी जीते हो
और तुम तो पहले से ही हारे हुए थे
अब क्या हारे हो
जीतने वालो क्या किसी सिद्धांत के बल पर तुम जीते हो
या फिर वो हारा है इसलिए तुम जीते हो
आज है परेशान जनता की वाकई
क्या कोई नया विकल्प उसके सामने आया है या
कोई नई बोतल में पुरानी शराब भर कर सामने लाया है
हारने वालो और जीतने वालो दे दो जनता को
नया विकल्प सम्मान पुर्वक भ्रष्टाचार मुक्त समाज में जीने का
इस से पहले की बहुत देर हो जाए
और नही तो कंही ऐसा न हो की
तुम्हारा ये राजनीति का मयखाना
तुम्हारे बुतखाने में तब्दील हो जाए II
लेखक प्रवीन चन्द्र झांझी 'हारा'
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