कलयुग का महाभारत
सिर्फ नहीं हुआ था त्रेता युग में महाभारत
बल्कि कलयुग में भी एक महाभारत चल रहा है
तब तो जंग खून के रिश्तो में थी
अब तो खून ही रंग बदल रहा है
तब हुआ था चीर हरण द्रोपदी का
अब तो गांधारी का ही चीर खतरे में पडा है
तब तो दुशासन ने किया था हरन चीर का
अब तो अर्जुन भी उसके साथ मिला है
तब युद्ध का कारण था एक धृतराष्ट्र
अब तो पूरा देश ही धृतराष्ट्रों से भरा है
तब लड़ी थी उन्होंने जंग सिदान्तो की
आज कौरव पांडव मानते है दोनों
कि सिदान्तो में क्या धरा है
मिल बांटकर खाते है दोनों
जानते है की लड़ने में क्या धरा है
खूब देखा खूब आजमाया सबको
थक कर भीष्म पितामह (जनता)
बाणों की शैया पर पढ़ा है
एक तरफ खडा दुर्योधन गदा लिए
दूसरी तरफ अर्जुन तीर ताने खडा है
इन दोनों से कौन बचाएगा मुझे
पितामह(जनता) यह सोच कर डरा है II
लेखक प्रवीन चंदर झांझी
सिर्फ नहीं हुआ था त्रेता युग में महाभारत
बल्कि कलयुग में भी एक महाभारत चल रहा है
तब तो जंग खून के रिश्तो में थी
अब तो खून ही रंग बदल रहा है
तब हुआ था चीर हरण द्रोपदी का
अब तो गांधारी का ही चीर खतरे में पडा है
तब तो दुशासन ने किया था हरन चीर का
अब तो अर्जुन भी उसके साथ मिला है
तब युद्ध का कारण था एक धृतराष्ट्र
अब तो पूरा देश ही धृतराष्ट्रों से भरा है
तब लड़ी थी उन्होंने जंग सिदान्तो की
आज कौरव पांडव मानते है दोनों
कि सिदान्तो में क्या धरा है
मिल बांटकर खाते है दोनों
जानते है की लड़ने में क्या धरा है
खूब देखा खूब आजमाया सबको
थक कर भीष्म पितामह (जनता)
बाणों की शैया पर पढ़ा है
एक तरफ खडा दुर्योधन गदा लिए
दूसरी तरफ अर्जुन तीर ताने खडा है
इन दोनों से कौन बचाएगा मुझे
पितामह(जनता) यह सोच कर डरा है II
लेखक प्रवीन चंदर झांझी
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